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अवसाद पर काबू कैसे पाएं

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अवसाद यानी डिप्रेशन जो कि एक मानसिक रोग से सबंध रखता है । इससे काफी वर्ग ग्रस्त हैं चाहे वह एक स्कूल जाता हुआ विद्यार्थी हो या एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति हो । सबके अपने अलग अलग भय होते हैं जिसका सही समय पर निवारण न किया जाए तो वह भय मन पर हावी होने लगता है जिसमें व्यक्ति अकेला रहता है , किसी से बात नहीं करता । नकारात्मक सोच का शिकार हो जाता है और हर गलती के लिए खुद को दोषी मानता है । वह अपना आत्मविश्वास खो देता है । डिप्रेशन में घिरा हुआ व्यक्ति यह सोचता है कि यह समय जल्द ही समाप्त हो जाएगा परन्तु यही वह गलत सोचता है ।

अवसाद में घिरा हुआ व्यक्ति में जीने की इच्छा कुछ नया करने की या खुद पर विश्वास रखने की कमी पाई गई है । यह व्यक्ति अपने आप मे अलग तरीके का व्यवहार करने लगते हैं । जैसे कि किसी ने थोड़ा सा भी कुछ कह दिया तो वह उस बात को दिल पर लगा कर दिनों या कभी महीनों तक उस बात से उदास रहते हैं । अवसाद से निकलने में व्यक्ति को काफी समय लगता है इसके दृढ़ संकल्प भी आवश्यक है । इससे निकलने के लिए आपके आस पास के व्यक्तियों का भी साथ चाहिए होगा । 

अवसाद किसी की उम्र नहीं देखता यह कभी भी किसी को भी अपने जाल में ले सकता है । मेडिकल थेरेपी इसके लिए उपयुक्त है परन्तु लाइफ कोच होना भी फायदेमंद साबित हो सकता है । 

महसूस और पीड़ित में अंतर। 

अक्सर व्यक्ति अवसाद के अंतर को जानने में असमर्थ रहता है । अगर व्यक्ति का दिन खराब जा रहा हो या किसी से बेवजह कहासुनी हो गई हो तो व्यक्ति अपने आप को अवसाद पीड़ित घोषित कर देता है परन्तु यह अवसाद नहीं है । अवसाद एक मानसिक रोग है जो दुखों की लंबी लिस्ट से उतपन्न होता है परन्तु यह जरूरी नहीं वह मुश्किल ही हो पर उसको हम अपने ऊपर हावी होने देते हैं । किसी को  मैं अच्छी तरह से पुराने अवसाद से पीड़ित जानता था, और इसने उनके रोजमर्रा के जीवन और जीवन शैली को प्रभावित किया। अपने सबसे खराब चरणों के दौरान, वह सुस्त महसूस करेगा और कुछ भी करने की इच्छाशक्ति खो देगा। वह द्वि घातुमान खाएगा, व्यायाम से बचें और इस वजह से अपना वजन कम कर सकता है, जिससे उसका मूड बिगड़ जाता है और उसकी ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है। एक तरह से, वह अवसाद के इस चक्र में फंस गया था कि चिकित्सा में मदद मिलेगी।

सभी आयु वर्ग के लोगों में अवसाद आम है यह एक स्कूल जाने वाला बच्चा या एक वयस्क हो सकता है। अवसाद के सामान्य लक्षण हैं लेकिन जो उदास है वह इसे आसानी से पहचान नहीं पाता है। कालदान एक ब्लॉग के माध्यम से ऐसे सभी लोगों की मदद करने की कोशिश करती है जहां वह आपको अवसाद के लक्षण और समाधान बताती है। अवसाद से संबंधित अधिक प्रश्नों के लिए, आप टिप्पणी अनुभाग में लिख सकते हैं।

कैसे निपटारा पाएं अवसाद से ?

व्यक्ति अवसाद को एक मामूली रोग समझता है और यह मानता है कि यह रोग धीरे धीरे निकल जाएगा । वह यह बताने में यह इसका इलाज चिकित्सक द्वारा कराने में घबराता है क्योंकि उसे डर लगता है कि कहीं बाहर उसे मजाक का कारण न बनना पड़े । परन्तु ऐसे करने से व्यक्ति अवसाद को बढ़ावा देता है । इससे अवसाद खतरनाक बीमारी का रूप भी ले सकती है । इससे निजात पाने के लिए आपको समय रहते अपनी बीमारी का जिक्र चिकित्सक से कर देनी चाहिए अथवा लाइफ कोच की भी सहायता लेनी चाहिए वह आपको जीवन जीने का अलग नजरिया भी पेश करेगा । हीलिंग एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है और इसके लिए बहुत धैर्य और समझ की आवश्यकता होती है। यदि आप उदास महसूस कर रहे हैं, तो आपको उन लोगों से मदद माँगने और उन तक पहुँचने की ज़रूरत है, जिन पर आप भरोसा करते हैं। 

लाइफ कोच क्या करता है ?

लाइफ कोच यानी जीवन को जीने का ढंग सिखाने वाला व्यक्ति । डिप्रेशन में घिरे व्यक्ति में यह पाया गया है कि वह खुद को अकेला रखता है और कुछ भी करने से कतराता है वही इस वक्त उसे अपना खोया हुआ आत्मविश्वास को जगाने के लिए सहायता चाहिए होता है वही विश्वास जगाने में लाइफ कोच मदद करता है । निम्नलिखित में कुछ सुझाव है जिसके प्रयोग से व्यक्ति को अपने अंदर कुछ बदलाव महसूस होगा ।

अधिक सक्रिय बनें 

‘खाली समय शैतान का’ यहाँ शैतान का अर्थ है नकारात्मक सोच। नकारात्मक सोच से निपटारे के लिए व्यक्ति को हर समय का हिसाब रखना होगा अपने आप को हर वक्त व्यस्त रखें ताकि आपके पास नकारात्मक सोच के लिए पर्याप्त मात्रा में समय न हो । बाहर टहलने निकले, खुली हवा में सांस ले। योग करें । 

स्वास्थ्य का समर्थन करें ।

स्वास्थ्य के लिए प्रतिदिन 8-9 घंटे की नींद लेना आवश्यक है । योग, गहरी साँस लेने, प्रगतिशील मांसपेशी छूट या ध्यान जैसी विश्राम तकनीकों का अभ्यास करें। वे अवसाद के लक्षणों को दूर करने, तनाव को कम करने और खुशी और कल्याण को बढ़ावा देने में मदद करता है ।

स्वास्थ्यवर्धक भोजन करें ।

पोष्टिक खाना हमारे शरीर के साथ दिमाग को भी तन्दरुस्त रखता है । पोष्टिक आहार आवश्यक हैं जिसमे विटामिन डी की भरपूर मात्रा हो । यह हमेशा ध्यान रखें कि किसी भी समय आपने भोजन का त्याग नहीं करना है । भोजन त्याग करने से आप अपने दिमाग की बीमारी को और खराब होने के लिए मौका दे रहे हैं।  

स्वंय से बात करें ।

डिप्रेशन में व्यक्ति अकेला महसूस करता है उसे किसी की आवश्यकता होती है जिससे वह अपना दुख दर्द बांट सके , मनुष्य को इस स्थिति में स्वयं का साथी बनना चाहिए खुद से बात करें । आप उन अच्छी यादों के बारे में भी सोच सकते हैं जो आपके पास हैं।

जोर से मैं कहता हूं और देखो

अपने प्रतिज्ञान को जोर से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि आप उन्हें अपने अपार्टमेंट या घर में हर जगह रखें। यह महसूस करना चाहिए जैसे आपने अपने चारों ओर सकारात्मकता की चमक रखी है और जब भी आप इसे देखते हैं तो यह चमकता है।

तनाव से निपटने और अपना सर्वश्रेष्ठ जीवन जीने के और तरीकों के बारे में जानने के लिए, भारत के सबसे प्रेरणादायक वक्ताओं में से एक, Kaldan Doma से संपर्क करें। 

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